कुछ कहना हे तुमसे…

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न तुम कुछ कहो ना में बस एसे ही चुप रहें
चुप्पी से ही हसें और आंसु भी एसेही बहे,
एक बार चलो कॉफ़ी पे कुछ कहना हे तुमसे …

दो दिन मिली , दो पल के लिए, आयी और चल दि,
लेकिन मेने तुम्हारी और तुमने मेरी सोच बदल दी।
ऊँची किसी मंजिल की छत पे चलो , कुछ कहना हे तुमसे…

कल रात जब तुम नही थी, ना कहो क्यों नहीं थी,
जाती तो हँसके जाती, तुमतो रुठ के नहीं थी ।
नेवर लेंड या फिर नार्निया चलो , कुछ कहना हे तुमसे …

पहले बताओ केसा रहा दिन तुम्हारा फिर तुम केसी हो?
कभी मुझसे बहोत जुदा तो कभी बिलकुल मेरे जैसी हो ।
चलो किसी सुमसाम राहोंपे हमकदम, कुछ केहना हे तुमसे …

कौनसा कदम आखरी हो, फितरत तुम्हारी लेंडमाईन जैसी,
देखने सोचने में दूध जेसी और पिनेमें वाइन जैसी।
चलो किसी समंदर किनारे,या बीचोंबीच, कुछ केहना हे तुमसे …

तसवीर लो अपने दिलकी,कसम खाओ हमेशा ऐसी रहोगी,
और दुनिया से कुछ भी केहना अपने आपसे सचही कहोगी।
चलो किसी सुमसाम खंडर या पुराने मंदिर, कुछ कहना हे तुमसे …

सिखादो मुजेभी तुम्हारी दूर से दीवाना करने की अदा
तुमपे ही आज़माके भूल जायेंगे, पक्का वादा
चलोना चाँद पे चलते हें, तारों पर टहलते हें ,कुछ कहना हे तुमसे …

रुको, बादमे देना कामके बहाने और आरामके बहाने,
अभी मेरे साथ चलो रंगीन सुबहा या हसीं शामके बहाने ।
पता नहीं क्या केहना हे मुझे लेकिन सचमे बहोत कुछ कहना हे तुमसे …

~ Shreyas

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